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AARTI – HEY SHARDE MAA

आरती : हे शारदे मां…
हे शारदे माँ , हे शारदे माँ,
हे शारदे माँ , हे शारदे माँ,
अज्ञानता से हमें तारदे माँ
तू स्वर की देवी ये संगीत तुझसे ,
हर शब्द तेरा है हर गीत तुझसे
हम है अकेले , हम है अधूरे ,
तेरी शरण हम हमें प्यार दे माँ ॥ हे शारदे माँ॥
मुनियों ने समझी , गुनियों ने जानी ,
वेदोंकी भाषा , पुराणों की बानी
हम भी तो समझे , हम भी तो जाने ,
विद्या का हमको अधिकार दे माँ ॥ हे शारदे माँ॥
तू श्वेतवर्णी कमल पे विराजे ,
हाथों में वीणा , मुकुट सरपे साजे
मनसे हमारे मिटाके अँधेरे ,
हमको उजालों का संसार दे माँ ॥ हे शारदे माँ॥
हे शारदे माँ , हे शारदे माँ .अज्ञानता से हमें तारदे माँ 🙂

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Shivji Ki Aarti

शिवजी की आरती 🙂
ॐ जय शिव औंकारा, स्वामी हर शिव औंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्धांगी धारा ॥
जय शिव औंकारा ॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे
स्वामी पंचानन राजे ।
हंसासन गरुड़ासन वृष वाहन साजे ॥
जय शिव औंकारा ॥

दो भुज चारु चतुर्भुज दस भुज से सोहे
स्वामी दस भुज से सोहे ।
तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥
जय शिव औंकारा ॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी
स्वामि मुण्डमाला धारी ।
चंदन मृग मद सोहे भाले शशि धारी ॥
जय शिव औंकारा ॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगे
स्वामी बाघाम्बर अंगे ।
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे ॥
जय शिव औंकारा ॥

कर में श्रेष्ठ कमण्डलु चक्र त्रिशूल धरता
स्वामी चक्र त्रिशूल धरता ।
जगकर्ता जगहर्ता जग पालन कर्ता ॥
जय शिव औंकारा ॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका
स्वामि जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित यह तीनों एका ।
जय शिव औंकारा ॥

निर्गुण शिव की आरती जो कोई नर गावे
स्वामि जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी मन वाँछित फल पावे ।
जय शिव औंकारा ॥

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Aarti Shree Ganesh Ji Ki

श्री गणेश जी की आरती 🙂
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा .
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी .
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया .
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥

हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा .
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥

दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी .
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥

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Santoshi Maa Ki Aarti

सन्तोषी माता की आरती 🙂
जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता ।
अपने सेवक जन की सुख सम्पति दाता ।
मैया जय सन्तोषी माता ।

सुन्दर चीर सुनहरी माँ धारण कीन्हो, मैया माँ धारण कींहो
हीरा पन्ना दमके तन शृंगार कीन्हो, मैया जय सन्तोषी माता ।

गेरू लाल छटा छबि बदन कमल सोहे, मैया बदन कमल सोहे
मंद हँसत करुणामयि त्रिभुवन मन मोहे, मैया जय सन्तोषी माता ।

स्वर्ण सिंहासन बैठी चँवर डुले प्यारे, मैया चँवर डुले प्यारे
धूप दीप मधु मेवा, भोज धरे न्यारे, मैया जय सन्तोषी माता ।

गुड़ और चना परम प्रिय ता में संतोष कियो, मैया ता में सन्तोष कियो
संतोषी कहलाई भक्तन विभव दियो, मैया जय सन्तोषी माता ।

शुक्रवार प्रिय मानत आज दिवस सो ही, मैया आज दिवस सो ही
भक्त मंडली छाई कथा सुनत मो ही, मैया जय सन्तोषी माता ।

मंदिर जग मग ज्योति मंगल ध्वनि छाई, मैया मंगल ध्वनि छाई
बिनय करें हम सेवक चरनन सिर नाई, मैया जय सन्तोषी माता ।

भक्ति भावमय पूजा अंगीकृत कीजै, मैया अंगीकृत कीजै
जो मन बसे हमारे इच्छित फल दीजै, मैया जय सन्तोषी माता ।

दुखी रिद्री रोगी संकट मुक्त किये, मैया संकट मुक्त किये
बहु धन धान्य भरे घर सुख सौभाग्य दिये, मैया जय सन्तोषी माता ।

ध्यान धरे जो तेरा वाँछित फल पायो, मनवाँछित फल पायो
पूजा कथा श्रवण कर घर आनन्द आयो, मैया जय सन्तोषी माता ।

चरण गहे की लज्जा रखियो जगदम्बे, मैया रखियो जगदम्बे
संकट तू ही निवारे दयामयी अम्बे, मैया जय सन्तोषी माता ।

सन्तोषी माता की आरती जो कोई जन गावे, मैया जो कोई जन गावे
ऋद्धि सिद्धि सुख सम्पति जी भर के पावे, मैया जय सन्तोषी माता ।

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Hanumanji Ki Aarti

आरती हनुमानजी की 🙂
आरति कीजै हनुमान लला की .
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ..
जाके बल से गिरिवर काँपे
रोग दोष जाके निकट न झाँके .
अंजनि पुत्र महा बलदायी
संतन के प्रभु सदा सहायी ..
आरति कीजै हनुमान लला की .

दे बीड़ा रघुनाथ पठाये
लंका जाय सिया सुधि लाये .
लंका सौ कोटि समुद्र सी खाई
जात पवनसुत बार न लाई ..
आरति कीजै हनुमान लला की .

लंका जारि असुर संघारे
सिया रामजी के काज संवारे .
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे
आन संजीवन प्राण उबारे ..
आरति कीजै हनुमान लला की .

पैठि पाताल तोड़ि यम कारे
अहिरावन की भुजा उखारे .
बाँये भुजा असुरदल मारे
दाहिने भुजा संत जन तारे ..
आरति कीजै हनुमान लला की .

सुर नर मुनि जन आरति उतारे
जय जय जय हनुमान उचारे .
कंचन थार कपूर लौ छाई
आरती करति अंजना माई ..
आरति कीजै हनुमान लला की .

जो हनुमान जी की आरति गावे
बसि वैकुण्ठ परम पद पावे .
आरति कीजै हनुमान लला की .
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की .

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