Krishna Janmashtami Shayari

कृष्ण जन्माष्टमी शायरी

भादों का महीना है अष्टमी की रात आई
जग का उद्धार करने जन्में हैं कृष्णा कन्हाई।

माखन चोर नन्द किशोर,
बांधी जिसने प्रीत की डोर.
हरे कृष्ण हरे मुरारी,
पूजती जिन्हें दुनिया सारी,
आओ उनके गुण गाएं सब मिल के जन्माष्टमी मनाये.

बांके बिहारी का नाम लो सहारा मिलेगा,
ये जीवन न तुमको दुबारा मिलेगा,
डूब रही अगर कश्ती मझधार में,
कृष्णा के नाम से सहारा मिलेगा.

गोकुल में जो करें निवास,
गोपियों संग जो रचाएँ रास,
देवकी-यशोदा हैं जिनकी मैया,
ऐसे ही हमारे कृष्ण कन्हैया.
जय श्री कृष्ण

मुरली मनोहर कृष्ण कन्हैया,
जमुना के तट पे विराजे हैं,
मोर मुकुट पर कानों में कुंडल,
कर में मुरलिया साजे हैं…

माखन चुराकर जिसने खाया,
बंसी बजाकर जिसने नचाया,
ख़ुशी मनाओ उनके जन्म दिन की,
जिन्होंने दुनिया को प्रेम का रास्ता दिखाया.

चंदन की ख़ुशबू को रेशम का हार,
सावन की सुगंध और बारिश की फुहार,
राधा की उम्मीद को कन्हैया का प्यार,
मुबारक हो आपको जन्माष्टमी का त्यौहार

माखन चुराकर जिसने खाया
बंसी बजाकर जिसने नचाया
ख़ुशी मनाओ उनके जन्म दिन की
जिन्होंने दुनिया को प्रेम का रास्ता दिखाया

राधा की भक्ति, मुरली की मिठास
माखन का स्वाद और गोपियों का रास
सब मिलके बनाता हैं जन्माष्टमी का दिन ख़ास

माखन का कटोरा
मिश्री का थाल
मिट्टी की खुशबू
बारिश की फुहार
राधा की उम्मीद
कन्हैया का प्यार
मुबारक हो आपको
जन्माष्टमी का त्यौहार

मटकी तोड़े, माखन खाए फिर भी सबके मन को भाये,
राधा के वो प्यारे मोहन,महिमा उनकी दुनिया गाये।

Category: Festival Shayari, Krishna Janmashtami

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