Amalaki Ekadashi Vrat Katha

Amalaki Ekadashi Vrat Katha भगवान विष्णु को समर्पित एक पावन व्रत की कथा है, जो फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को सुनाई और पढ़ी जाती है। इस दिन आँवला वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। कथा के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत पापों का नाश करता है, पुण्य प्रदान करता है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि लाता है।

Amalaki Ekadashi Vrat Katha

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🌼 आमलकी एकादशी व्रत कथा एवं माहात्म्य

📅 तिथि व महत्व

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है।
आंवले के वृक्ष (आमलकी) को शास्त्रों में अत्यंत पवित्र एवं श्रेष्ठ माना गया है।
भगवान विष्णु ने सृष्टि निर्माण के समय आंवले को आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया।
शास्त्रों में कहा गया है कि आंवले के प्रत्येक अंग में भगवान का निवास है।
इस व्रत के पालन से संपूर्ण पापों का नाश, मोक्ष और विष्णु कृपा प्राप्त होती है।

🙏 पूजन विधि

दशमी की रात को ही व्रती को भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए एकादशी व्रत का संकल्प मन में लेना चाहिए।

एकादशी की प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने बैठकर तिल, कुश और जल लेकर संकल्प करें —
“मैं भगवान विष्णु की प्रसन्नता एवं मोक्ष की प्राप्ति के लिए आमलकी एकादशी का व्रत करता हूँ। श्रीहरि कृपा करें कि यह व्रत सफल हो।”

संकल्प मंत्र:
“मम कायिकवाचिकमानसिकसांसर्गिकपातकोपपातकदुरितक्षयपूर्वकश्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलप्राप्तयै श्रीपरमेश्वरप्रीतिकामनायै आमलकीएकादशीव्रतमहंकरिष्ये॥”

षोडषोपचार से भगवान विष्णु की पूजा करें।

तत्पश्चात आंवले के वृक्ष का पूजन करें।

वृक्ष के चारों ओर भूमि को शुद्ध करें।

गाय के गोबर से पवित्र कर वेदी बनाकर कलश स्थापित करें।

कलश में तीर्थ, देवता और सागर का आह्वान कर पंचरत्न व सुगंध डालें।

कलश पर पंचपल्लव रखें, दीप प्रज्वलित करें, श्रीखंड चंदन से लेप कर वस्त्र पहनाएँ।

अंत में कलश पर भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा करें।

रात्रि को जागरण करें, भजन-कीर्तन और भगवान की कथा का श्रवण करें।

द्वादशी को ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा दें और परशुराम की मूर्ति सहित कलश दान कर दें।

इसके पश्चात व्रती स्वयं अन्न-जल ग्रहण करे।

📖 व्रत कथा

भगवान विष्णु ने कहा है —
“हे प्राणी! जो मोक्ष और स्वर्ग की प्राप्ति चाहते हैं, उनके लिए फाल्गुन शुक्ल पक्ष की यह एकादशी श्रेष्ठ है।

प्राचीनकाल में इस व्रत के प्रभाव से असुर भी दिव्य देह पाकर स्वर्ग में प्रवेश कर सके।
इस व्रत के प्रभाव से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थ सिद्ध होते हैं।”

पद्मपुराण में वर्णित है कि —
एक बार राजा चैत‍्ररथ ने आमलकी एकादशी का व्रत किया।
वह पूरे भाव से आंवले के वृक्ष का पूजन कर रात्रि भर भगवान विष्णु का कीर्तन करता रहा।
व्रत के पुण्य प्रभाव से वह राजा और उसकी प्रजा समस्त पापों से मुक्त हुए और अंत में विष्णुलोक को प्राप्त हुए।

🌟 व्रत का फल व लाभ

इस व्रत से जीवन में आरोग्य, दीर्घायु और सुख-समृद्धि मिलती है।

पाप नष्ट होते हैं और व्रती को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

जो व्यक्ति इस दिन आंवले का पूजन करता है, उसके पुण्य का फल सभी यज्ञों से बढ़कर होता है।

आंवले का सेवन और दान करने से दरिद्रता और रोग दूर होते हैं।

🌸 निष्कर्ष

आमलकी एकादशी केवल उपवास नहीं, बल्कि भगवान विष्णु और आंवले के पवित्र वृक्ष की उपासना का दिव्य पर्व है।
इस व्रत का पालन करने से जीवन में विजय, आरोग्य और विष्णु भक्ति का अविनाशी फल प्राप्त होता है।

आमलकी एकादशी की शुभकामनाएँ

Amalaki Ekadashi Ki Hardik Shubhkamnayein

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🌿
आमलकी एकादशी के पावन अवसर पर
भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा से
आपके जीवन में पवित्रता और शांति का वास हो।
आँवले के पुण्य स्पर्श से
घर-परिवार में सुख और समृद्धि बढ़े।
आमलकी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

🪔
आज का यह व्रत आत्मशुद्धि और पुण्य का प्रतीक है।
आँवला वृक्ष के पूजन से
जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।
श्रीहरि का आशीर्वाद
आपके हर कर्म को मंगलमय बनाए।
आमलकी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

🌸
आमलकी एकादशी का यह शुभ दिन
आपके जीवन से नकारात्मकता दूर करे
और भक्ति का प्रकाश फैलाए।
भगवान विष्णु की कृपा से
हर मनोकामना पूर्ण हो।
आमलकी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

🌿
आँवले के पूजन और श्रीहरि के स्मरण से
जीवन में संतुलन और स्वास्थ्य बना रहे।
यह पावन एकादशी
आपके परिवार में सुख, संतोष और सद्भाव बढ़ाए।
आमलकी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

💫
आमलकी एकादशी का व्रत
पापों का नाश कर पुण्य प्रदान करता है।
श्रीहरि विष्णु का दिव्य आशीर्वाद
आपके जीवन को सफलता और आनंद से भर दे।
आमलकी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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