Devshayani Ekadashi Vrat Katha

Devshayani Ekadashi Vrat Katha

Download Image Devshayani Ekadashi Vrat Katha


🌿 देवशयनी (हरि शयनी) एकादशी व्रत कथा एवं महात्म्य 🌿

📌 तिथि व महत्व

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी, हरि शयनी या आषाढ़ी एकादशी कहा जाता है।
इस दिन से चतुर्मास की शुरुआत होती है और भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर योगनिद्रा में जाते हैं।

📖 शास्त्रों में कहा गया है –
“आषाढ़ शुक्ल एकादशी का व्रत करने से समस्त पाप नष्ट होते हैं और भक्त को पुण्यलोक की प्राप्ति होती है।
यह व्रत विशेष रूप से मोक्ष प्रदान करने वाला है।”

👉 इस दिन से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवप्रबोधिनी) तक भगवान योगनिद्रा में रहते हैं, इसलिए इन चार महीनों में विवाह और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

📖 व्रत कथा

पुराणों के अनुसार एक समय धर्मराज युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से आषाढ़ शुक्ल एकादशी का महात्म्य पूछा।

श्रीकृष्ण बोले —
“हे राजन! इस एकादशी का नाम हरि शयनी है। इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं।
जो भक्त इस दिन श्रद्धा से उपवास कर विष्णु भगवान का पूजन करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है।”

📖 कथा-प्रसंग:
सत्ययुग में बलि नामक दानव राजा ने तीनों लोक जीत लिए थे।
तब भगवान विष्णु वामन अवतार में प्रकट हुए और तीन पग भूमि दान में माँगी।
राजा बलि ने संकल्प किया और वामन भगवान ने तीन पगों में ही संपूर्ण ब्रह्मांड नाप लिया।
तीसरा पग न रखने का स्थान न मिलने पर बलि ने अपना शीश अर्पित किया।

भगवान ने प्रसन्न होकर बलि को पाताल लोक का स्वामी बनाया और उसे अपने दर्शन का वचन दिया।
इसी दिन भगवान ने क्षीरसागर में योगनिद्रा धारण की।
तभी से इसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है।

🌼 भावार्थ

– यह एकादशी हमें यह सिखाती है कि अहंकार छोड़कर ईश्वर को समर्पण करने से ही सच्ची मुक्ति मिलती है।
– भगवान का वामन अवतार धर्म की रक्षा और दान के महत्त्व का स्मरण कराता है।
– यह दिन भक्त के लिए साधना, जप, तप और संयम का प्रारंभिक द्वार है।

🌸 व्रत के लाभ

🔹 सभी पापों का क्षय
🔹 जीवन में धर्म, पुण्य और समृद्धि
🔹 चतुर्मास में तप, जप और व्रत का शुभारंभ
🔹 मोक्ष और विष्णुधाम की प्राप्ति
🔹 पितरों की शांति और संतोष

📚 ग्रंथ-संदर्भ

– पद्म पुराण – एकादशी माहात्म्य
– भागवत पुराण, अष्टम स्कंध (वामन अवतार प्रसंग)

🙏 उपसंहार

🌿
“देवशयनी एकादशी का व्रत करने से भक्त को समस्त पापों से मुक्ति और विष्णुधाम की प्राप्ति होती है।
यही दिन चतुर्मास के शुभारंभ का द्वार है, जब भगवान योगनिद्रा में जाते हैं और भक्तों को तप व भक्ति का अवसर प्रदान करते हैं।”

✨ जय श्रीहरि विष्णु ✨

This picture was submitted by Smita Haldankar.

Leave a comment