गुरु वह तेज हैं, जिनके आगमन से संशय के सारे अंधकार मिट जाते हैं,
गुरु वह मृदंग हैं, जिनके बजते ही अनाहद नाद गूंजने लगते हैं…
गुरु वह नदी हैं, जो निरंतर हमारे प्राणों में बहती है,
और गुरु ही वह सत-चित-आनंद हैं, जो हमें हमारी वास्तविक पहचान देते हैं!
गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई!