Jaya Ekadashi Vrat Katha

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🌼 जया एकादशी व्रत कथा एवं माहात्म्य

📅 तिथि व महत्व

माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है।
यह व्रत ब्रह्महत्या जैसे घोर पापों का नाश करने वाला और भूत-पिशाच आदि कठिन योनियों से मुक्ति दिलाने वाला है।
इस व्रत का पालन करने से मनुष्य को मोक्ष प्राप्त होता है और वह विष्णुलोक का अधिकारी बनता है।

🙏 पूजन विधि

प्रातःकाल स्नान कर संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा करें।

व्रती को दिनभर उपवास रखना चाहिए और रात्रि को जागरण करना चाहिए।

द्वादशी के दिन ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर व्रत का समापन करें।

📖 विस्तृत कथा (पद्मपुराण अनुसार)

धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा —
“हे प्रभु! माघ शुक्ल एकादशी का क्या नाम है और इसका माहात्म्य क्या है?”

भगवान श्रीकृष्ण बोले —
“हे राजन! इस एकादशी का नाम जया एकादशी है। इसका व्रत करने से मनुष्य भूत-पिशाच योनियों से मुक्त होकर स्वर्ग प्राप्त करता है। सुनो, मैं तुम्हें इसकी कथा सुनाता हूँ।”

🌺 देवराज इंद्र का शाप
स्वर्ग में देवताओं के राजा इंद्र नंदनवन में अप्सराओं और गंधर्वों के साथ विहार कर रहे थे।
उस समय पुष्पदंत की कन्या पुष्पवती और चित्रसेन का पुत्र माल्यवान भी गान कर रहे थे।
गान के समय पुष्पवती माल्यवान पर मोहित हो गई और दोनों प्रेमवश ताल-सुर भूल गए।

इंद्र ने इसे अपना अपमान समझा और क्रोधित होकर शाप दिया —
“हे मूर्खों! तुमने मेरी आज्ञा का उल्लंघन किया है। अतः तुम दोनों मृत्युलोक में जाकर पिशाच रूप धारण करो।”

🌲 पिशाच योनि का दु:ख
शापवश वे हिमालय पर पिशाच रूप में दु:ख भोगने लगे।
ना उन्हें भोजन का सुख था, ना निद्रा मिलती थी।
कभी शीत से दाँत बजते, तो कभी भूख-प्यास से व्याकुल रहते।
वे आपस में विचार करते — “किस पाप के कारण हमें यह दु:खदायी योनि मिली?”

✨ जया एकादशी का प्रभाव
दैवयोग से उसी समय माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी आ गई।
उस दिन उन्होंने न कोई पाप कर्म किया, न अन्न ग्रहण किया।
फल मात्र खाकर उपवास किया और रात्रि को ठंड में पीपल के नीचे जागरण करते रहे।

प्रभात होते ही उस व्रत और जागरण के प्रभाव से उनकी पिशाच योनि समाप्त हो गई।
वे पुनः अपने गंधर्व और अप्सरा रूप में, सुंदर वस्त्राभूषणों से अलंकृत होकर स्वर्ग को जाने लगे।

🌸 स्वर्ग वापसी
देवताओं ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।
इंद्र आश्चर्यचकित होकर बोले — “तुम पिशाच योनि से कैसे मुक्त हुए?”
माल्यवान ने उत्तर दिया —
“हे देवराज! भगवान विष्णु की कृपा और जया एकादशी व्रत के प्रभाव से ही हम पुनः अपने स्वरूप को प्राप्त हुए हैं।”

इंद्र ने प्रसन्न होकर कहा —
“विष्णुभक्त धन्य है, उनका सम्मान हम सबको करना चाहिए। अब तुम स्वर्ग में विहार करो।”

🌟 व्रत का फल व लाभ

इस व्रत से पिशाच, भूत-प्रेतादि योनियों से मुक्ति मिलती है।

ब्रह्महत्या जैसे महापाप नष्ट होते हैं।

मनुष्य को यज्ञ, दान और तप के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

अंत में विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।

🌼 निष्कर्ष

जया एकादशी केवल उपवास का ही व्रत नहीं है,
बल्कि यह मन को पवित्र करने, पाप से मुक्ति दिलाने और स्वर्ग व मोक्ष का द्वार खोलने वाली एक महान तिथि है।

जया एकादशी की शुभकामनाएँ

Jaya Ekadashi Ki Hardik Shubhkamnayein

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जया एकादशी के पावन अवसर पर
भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा से
आपके जीवन से हर भय और बाधा दूर हो।
मन में भक्ति जगे और कर्मों में विजय प्राप्त हो।
**जया एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!**

🪔
आज का यह पुण्य व्रत
पापों का नाश कर आत्मा को शुद्ध करता है।
श्रीहरि विष्णु का आशीर्वाद
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**जया एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!**

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जया एकादशी का यह शुभ दिन
जीवन में साहस, धैर्य और सकारात्मकता लाए।
भगवान विष्णु की कृपा से
हर कठिनाई पर आपकी विजय हो।
**जया एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!**

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इस पावन एकादशी पर
श्रीहरि विष्णु आपके हृदय में
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हर प्रयास में आपको सफलता प्राप्त हो।
**जया एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!**

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जया एकादशी का व्रत
जीवन के सभी बंधनों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है।
भगवान विष्णु की कृपा से
आपका जीवन मंगलमय और आनंदमय बने।
**जया एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!**

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