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KUSHMANDA MATA

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माँ कूष्मांडा मंत्र –
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढा अष्टभुजा कुष्माण्डा यशस्वनीम्॥

भगवती माँ दुर्गा जी के चौथे स्वरुप का नाम कूष्मांडा है !
अपनी मंद हल्की हसीं द्वारा अंड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न
करने के कारण इन्हें कुष्मांडा देवी के नाम से अभिहित किया गया है !
जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था , चारों ओर अन्धकार ही अंधकार व्याप्त था,
तब माँ कुष्मांडा ने ही अपनी हास्य से ब्रह्माण्ड कि रचना की थी !
अतः यही सृष्टि की आदि-स्वरूपा आदि शक्ति है !

This picture was submitted by Smita Haldankar.

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