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🌼 पद्मिनी (कमला) एकादशी व्रत कथा एवं माहात्म्य

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📅 तिथि व महत्व
– यह व्रत अधिक मास (मलमास) के शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है।
– इसे पद्मिनी एकादशी या कमला एकादशी भी कहा जाता है।
– सामान्यतः वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं, लेकिन जब अधिक मास आता है तो संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।
– यह व्रत सर्वसिद्धिदायक है, विशेषकर संतान सुख की प्राप्ति और मोक्ष देने वाला।
🙏 व्रत विधि
– दशमी से ही नियम आरंभ करें: जौं-चावल का भोजन करें, नमक का त्याग करें, भूमि पर सोएँ और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
– एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शौचादि से निवृत्त होकर दन्तधावन करें और बारह कुल्ले जल से करें।
– गोबर, मिट्टी, तिल, कुशा और आँवले के चूर्ण से तीर्थ स्नान करें।
– श्वेत वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें।
– रात्रि जागरण अवश्य करें और द्वादशी को ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें।
📖 कथा
त्रेतायुग में हैहय वंश के राजा कृतवीर्य महिष्मती पुरी में राज्य करते थे। उनकी एक हजार रानियाँ थीं, किंतु संतान न थी। उन्होंने अनेक देवताओं की आराधना, पितृ तर्पण और वैद्योपचार किए, किंतु कोई फल न मिला।
राजा की परमप्रिय रानी पद्मिनी (राजा हरिश्चंद्र की कन्या) उनके साथ तपस्या हेतु गंधमादन पर्वत पर चली गईं। दोनों ने वल्कल वस्त्र धारण कर कठोर तप किया। राजा ने दस हजार वर्ष तक तपस्या की, फिर भी संतान प्राप्त नहीं हुई।
एक दिन सती अनसूया ने पद्मिनी को उपदेश दिया –
“हे रानी! मलमास में आने वाली शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी का व्रत और रात्रि जागरण करो। इस व्रत से तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी।”
रानी पद्मिनी ने संतान-प्राप्ति की इच्छा से विधिपूर्वक यह व्रत किया। निराहार रहकर दिन-रात भगवान विष्णु का स्मरण किया। व्रत पूर्ण होने पर भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और वरदान दिया –
“तुम्हें एक महान बलवान पुत्र प्राप्त होगा।”
वरदान के प्रभाव से उन्हें कार्तिवीर्य अर्जुन नामक पराक्रमी पुत्र प्राप्त हुआ, जो अपने समय का अद्वितीय योद्धा और बलशाली राजा बना।
✨ फल व लाभ
– पद्मिनी एकादशी का व्रत संतान सुख की प्राप्ति कराने वाला है।
– मनोकामना पूर्ण होती है और दरिद्रता, दुःख व क्लेश दूर होते हैं।
– व्रती को अखंड कीर्ति, यश और अंत में विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
– इस कथा का श्रवण और पाठ भी अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायक है।
🌸 निष्कर्ष
पद्मिनी (कमला) एकादशी विशेषकर संतान-प्राप्ति, धन-वैभव, और मोक्ष प्रदान करने वाली है।
जो भक्त श्रद्धा-भाव से इस व्रत का पालन करते हैं, वे जीवन में सुख-समृद्धि और अंत में श्रीहरि विष्णु के परमधाम को प्राप्त करते हैं।
पद्मिनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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