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Ram Charit Manas Shlok

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शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं
ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्‌।
रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं
वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्‌॥ (१)

भावार्थ:- शान्त, सनातन, अप्रमेय, निष्पाप, मोक्ष और परम शान्ति प्रदान करने वाले, ब्रह्मा जी, शंकर जी और शेषनाग जी से निरंतर सेवित, वेदों के द्वारा जानने योग्य, सर्वव्यापक, देवताओं में सबसे बड़े, माया से मनुष्य रूप में दिखने वाले, समस्त पापों को हरने वाले, करुणा की खान, रघुकुल में श्रेष्ठ तथा राजाओं के शिरोमणि श्रीराम कहलाने वाले जगत को धारण करने वाले जगदीश्वर की मैं वंदना करता हूँ (१)

This picture was submitted by Sunil Sharma.

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