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Vijaya Ekadashi Vrat Katha भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और जीवन में विजय व सफलता पाने का पावन व्रत है। इस एकादशी की कथा भक्ति, संयम और विश्वास की महिमा को दर्शाती है। मान्यता है कि श्रद्धा से यह व्रत करने पर बाधाएँ दूर होती हैं और साधक को धर्म, साहस और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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📅 तिथि व महत्व
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहते हैं।
यह व्रत करने से मनुष्य को सभी कार्यों में विजय प्राप्त होती है।
इसका महात्म्य सुनने या पढ़ने से भी समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
🙏 पूजन विधि
दशमी तिथि से ही व्रती को नियमपूर्वक रहना चाहिए।
दशमी के दिन स्वर्ण, रजत, ताँबा या मिट्टी का एक कलश बनाकर उसमें जल भरें और पाँच प्रकार के पल्लव रखें।
उसके नीचे सतनजा (सात अनाज का मिश्रण) और ऊपर जौ रखें।
उस कलश पर भगवान श्रीनारायण की मूर्ति स्थापित करें।
एकादशी के दिन स्नान कर विधिवत धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल आदि से पूजन करें।
दिनभर उपवास रखें और रात्रि को जागरण करें।
द्वादशी के दिन ब्राह्मण को दान देकर व्रत का समापन करें।
📖 व्रत कथा
धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा —
“हे जनार्दन! फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है और इसकी विधि क्या है?”
श्रीकृष्ण बोले —
“हे राजन्! यह विजया एकादशी है। इसका व्रत करने से सब कार्य सिद्ध होते हैं और विजय अवश्य मिलती है। सुनो, मैं तुम्हें इसकी कथा सुनाता हूँ।”
🌺 रामायण प्रसंग
त्रेतायुग में जब श्रीराम को वनवास मिला और रावण ने माता सीता का हरण किया, तब श्रीराम ने लक्ष्मण व वानरसेना सहित लंका की ओर प्रस्थान किया।
समुद्र के तट पर पहुँचकर श्रीराम चिंतित हुए —
“इस विशाल समुद्र को पार कैसे किया जाए?”
लक्ष्मणजी ने कहा —
“हे प्रभु! समीप ही वकदालभ्य ऋषि का आश्रम है। वे उपाय बताएँगे।”
श्रीराम वहाँ पहुँचे और मुनि को प्रणाम कर निवेदन किया —
“हे ऋषिवर! मैं समुद्र पार कर लंका जाना चाहता हूँ। कृपा कर उपाय बताइए।”
🌸 विजया एकादशी का उपाय
वकदालभ्य ऋषि बोले —
“हे राम! यदि आप फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत करेंगे तो आपकी विजय सुनिश्चित होगी और समुद्र भी पार हो जाएगा।”
ऋषि ने व्रत की विधि बताई —
दशमी से कलश स्थापित कर भगवान विष्णु की पूजा करो।
एकादशी को उपवास और जागरण करो।
द्वादशी को कलश दान दो।
श्रीराम ने सेना सहित यह व्रत किया।
व्रत के प्रभाव से समुद्र पार हुआ और अंततः रावण पर विजय प्राप्त की।
🌟 व्रत का फल व लाभ
विजया एकादशी व्रत से मनुष्य को सभी कार्यों में विजय मिलती है।
यह व्रत पुराने व नए दोनों प्रकार के पापों का नाश करता है।
जीवन में आने वाली हर कठिनाई दूर होती है।
विष्णु कृपा से मोक्ष और परम सुख की प्राप्ति होती है।
इस व्रत की कथा सुनने/पढ़ने से वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
🌼 निष्कर्ष
विजया एकादशी का व्रत केवल विजय का प्रतीक ही नहीं,
बल्कि यह धर्म, संयम और भगवान विष्णु की शरण में आने का दिव्य अवसर है।
इस व्रत के प्रभाव से साधक सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में सफल और विजयी होता है।
विजया एकादशी की शुभकामनाएँ

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