Aapa Taje Hari Bhaje, Nakh Sikh Taje Vikar


आपा तजे हरि भजे, नख सिख तजे विकार ।
सब जीवन से निर्भैर रहे, साधू मता है सार ॥

अर्थ :
जो व्यक्ति अपने अहम् को छोड़कर, भगवान् कि उपासना करता है, अपने दोषों को त्याग देता है, और किसी जीव-जंतु से बैर नहीं रखता, वह व्यक्ति साधू के सामान और बुद्धिमान होता है।

This picture was submitted by Smita Haldankar.

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