Maa Bramhcharini ji ki Aarti


भगवती माँ दुर्गा की नव शक्तियों का दूसरा स्वरुप ब्रह्मचारिणी का है !
यंहा ‘ब्रह्म ‘ शब्द का अर्थ तपस्या है ! ब्रह्मचारिणी – तप का आचरण करने वाली
वेदस्तत्वं तपो ब्रह्म – वेद, तत्व और तप ‘ ब्रह्म शब्द के अर्थ है !
ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरुप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है 

मां ब्रह्माचारिणी देवी जी की आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो।

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा।

जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।

कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए।

उसकी विरति रहे ठिकाने। जो ​तेरी महिमा को जाने।

रुद्राक्ष की माला ले कर।जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।

आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना।

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम।

भक्त तेरे चरणों का पुजारी।रखना लाज मेरी महतारी।

माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

This picture was submitted by Smita Haldankar.

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