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माँ दुर्गा भक्ति शायरी – विस्तार सहित
(शक्ति, करुणा और विजय की दिव्य वाणी)

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शक्ति की माँ, कृपा की धारा,
हर भक्त की रक्षा करती सहारा।
दुर्गा नाम जहाँ गूंजे भारी,
वहाँ हार नहीं, बस जयकारा जारी।
🌿 भावार्थ:
– माँ दुर्गा केवल देवी नहीं, वे चेतना की आदिशक्ति हैं।
जब हम उन्हें पुकारते हैं, तो जीवन की हर बाधा में
एक अदृश्य शक्ति हमें थाम लेती है।
उनका नाम वह रक्षक मंत्र है जो भय को हटाकर
हमें साहस और विजय से भर देता है।
जहाँ माँ का स्मरण होता है, वहाँ कोई पराजय नहीं –
बल्कि केवल विजय का जयकारा गूंजता है।
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🌿 भावार्थ:
– जो भी व्यक्ति श्रद्धा से माँ दुर्गा का नाम जपता है,
उसके जीवन की सभी बाधाएँ धीरे-धीरे दूर हो जाती हैं।
माँ की कृपा से ना केवल संकटों से रक्षा मिलती है,
बल्कि हमारी वाणी, सोच और कर्म भी शुभ होने लगते हैं।
ऐसे भक्त के जीवन में स्थायी शुभता का प्रवाह बना रहता है।
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🌿 भावार्थ:
– माँ दुर्गा हर उस व्यक्ति के साथ खड़ी रहती हैं,
जो अपने भीतर साहस की ज्योति जलाना चाहता है।
वे निर्बलों को आत्मबल देती हैं,
और जो डरता है, उसे अडिग बना देती हैं।
उनका स्मरण मात्र ही भय को भ्रम बना देता है।
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तेरा तेज जब मन में समा जाए,
तो घोर निराशा भी मुस्कान में बदल जाए।
हे चंडी माई, तुझसे नाता जोड़ लिया,
अब किसी तूफ़ान से क्या डर लिया?
🌿 भावार्थ:
– माँ चंडी – माँ का वह रूप जो रक्षण और युद्ध दोनों में समर्थ है।
जब हम उनके तेज को भीतर उतार लेते हैं,
तो दुनिया के किसी भी तूफान का प्रभाव हमें डिगा नहीं सकता।
उनसे जुड़ते ही हम जान जाते हैं —
कि बाहर की परिस्थितियाँ कमजोर नहीं,
हमारा भीतर मज़बूत होना चाहिए।
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माँ की मूरत जब मन में बस जाए,
तो अशांत हृदय भी शांत हो जाए।
जो आँखों से बहते अश्रु हों भारी,
माँ की कृपा से बनें वे भी सच्ची भक्ति की सवारी।
🌿 भावार्थ:
– माँ दुर्गा का स्मरण केवल संकट हरता नहीं,
बल्कि हृदय की बेचैनी को भी प्रेम में बदल देता है।
जब उनकी छवि मन में स्थिर हो जाती है,
तो दुख भी भक्ति का माध्यम बन जाते हैं।
आँसुओं में भी पूजा का भाव समा जाता है।
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जय भवानी! जय जगदंबे!
तेरे नाम से ही संकट दंभ दे।
तेरी स्तुति से बढ़े श्रद्धा का भाव,
माँ तू ही मेरी रक्षा की नाव।
🌿 भावार्थ:
– भवानी और जगदंबा — माँ के वे नाम जो संपूर्ण सृष्टि के लिए हैं।
उनके नाम से ही संकट घमंड छोड़ देता है।
जब कोई भक्त सच्चे भाव से उनकी स्तुति करता है,
तो वह केवल स्तुति नहीं, बल्कि एक आत्मिक रक्षा कवच बन जाता है।
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सिंह पर सवार जो माँ आई,
उसकी चाल से भी काँपे परछाई।
तेरे चरणों में जो नतमस्तक हो जाए,
उसका भाग्य स्वयं नवरत्न पहन जाए।
🌿 भावार्थ:
– माँ दुर्गा का सिंह पर सवार होना शक्ति, नियंत्रण और भय से परे साहस का प्रतीक है।
जब कोई भक्त पूर्ण समर्पण से उनके चरणों में झुकता है,
तो उसका भाग्य स्वयं तेजस्विता से चमकने लगता है।
माँ की कृपा से जीवन में ऐसा तेज आ जाता है कि बाधाएँ भी मार्ग बदल लेती हैं।
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तेरे द्वार की भिक्षा भी राजसी लगे,
तेरे दर्शन से ही मन शांत और उजासि लगे।
माँ, बस तुझसे जुड़ जाए मेरा मन,
बाक़ी सब तेरा – मैं तेरा निर्धन।
🌿 भावार्थ:
– माँ दुर्गा के सान्निध्य में साधारण भी असाधारण लगने लगता है।
जब मन माँ से जुड़ता है, तो भीतर का संतोष इतना गहरा हो जाता है
कि भौतिक इच्छाएँ गौण हो जाती हैं।
ऐसे भाव से जुड़ा भक्त, माँ की कृपा से जीवन की सच्ची समृद्धि पा लेता है।
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माँ की भक्ति में जब आँखें नम हो जाएं,
तो समझो आत्मा माँ के चरणों में रम जाए।
वो आँसू भी पूजा बन जाते हैं,
जो दिल से माँ को याद करते हुए बह जाते हैं।
🌿 भावार्थ:
– भक्ति केवल शब्दों से नहीं, भावों से होती है।
जब माँ दुर्गा का स्मरण इतना गहरा हो कि आँखें अश्रुपूरित हो जाएं,
तो वे आँसू भी माँ के लिए अर्पण बन जाते हैं।
ऐसे क्षणों में आत्मा माँ के चरणों में स्थिर हो जाती है।
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नवरात्रि का हर दिन माँ का वरदान,
हर रात माँ का रक्षक संधान।
माँ अम्बे की भक्ति जो मन से निभाए,
उसके जीवन में अंधकार ना आए।
🌿 भावार्थ:
– नवरात्रि के नौ दिन माँ की ऊर्जा का पर्व हैं।
जो इन दिनों को सच्चे मन से माँ की आराधना में लगाता है,
उसे केवल उत्सव नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति, आत्म-विश्वास और सुरक्षा का वरदान प्राप्त होता है।
ऐसे जीवन में कोई अंधकार टिक नहीं पाता।
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तेरे नाम से ही साहस मिले,
तेरी कृपा से हर ज़ख्म सिले।
हे आदिशक्ति! तू ही सहारा,
तेरे बिना ये जीवन अधूरा सारा।
🌿 भावार्थ:
– माँ दुर्गा का नाम केवल पूजा के लिए नहीं,
बल्कि जीवन में स्थिरता, साहस और उपचार के लिए है।
जब हम जीवन की टूटन में माँ को पुकारते हैं,
तो उनकी कृपा हमें भीतर से सहेजती है।
उनके बिना भक्ति और जीवन दोनों अधूरे हैं।
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माँ, तू है मंत्र और तू ही है शक्ति,
तेरे बिना जीवन केवल एक परीक्षा की पथिकक्ति।
जो तुझ पर रखे अडिग विश्वास,
उसके जीवन में ना कोई उदास।
🌿 भावार्थ:
– माँ दुर्गा ही साधना का केंद्र हैं और वही सफलता का स्रोत।
जब कोई उन्हें पूर्ण निष्ठा और विश्वास से अपनाता है,
तो उसका जीवन कठिनाइयों से भरा हो सकता है,
परंतु मन में कभी निराशा नहीं रहती।
माँ का साथ विश्वास को अमिट कर देता है।
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माँ की ममता जब जीवन में उतरती है,
तो शूल भी फूल सी बिछ जाती है।
हे जगतजननी! तू ही जीवन की मौन आराधना,
तेरे बिना ना कोई पूर्ण साधना।
🌿 भावार्थ:
– माँ की करुणा ऐसी है कि वह जीवन की सबसे कठिन राह को भी
मुलायम बना देती है।
उनकी मौन उपस्थिति ही ऐसी होती है कि
भक्त के हर भाव में आराधना स्वतः समा जाती है।
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🙏 माँ दुर्गा की कृपा से आप सबका जीवन साहस, संयम और सफलता से भर जाए।
🌺 जय माँ जगदम्बे 🌺