Saibaba Vachan No. 10


साईं बाबा दसवां वचन:
‘मुझमें लीन वचन मन काया , उसका ऋण न कभी चुकाया.’
– जो भक्त मन, वचन और कर्म से मुझ में लीन रहता है, मैं उसका हमेशा ऋणी रहता हूं. उस भक्त के जीवन की सारी जिम्मेदारी मेरी है.

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