Search

Maa Skandmata

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars 18

Download Image
भगवती माँ दुर्गा जी के पाचवें स्वरुप को
स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है !

भगवान् स्कन्द ‘कुमार कार्तिकेय ‘ की
स्कंदमाता : मां दुर्गा का पांचवा स्वरूप

नवरात्रि में पाँचवें दिन इस देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। कहते हैं कि इनकी कृपा से

मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं।

इस देवी की चार भुजाएं हैं। यह दायीं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बायीं तरफ ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है।

पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं स्कंदमाता।

इनका वर्ण एकदम शुभ्र है। यह कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। सिंह इनका वाहन है।

शास्त्रों में इसका पुष्कल महत्व बताया गया है। इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। भक्त को मोक्ष मिलता है।

सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है। अतः मन को एकाग्र रखकर और पवित्र रखकर इस देवी की आराधना करने वाले साधक या भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती है। उनकी पूजा से मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है।

यह देवी विद्वानों और सेवकों को पैदा करने वाली शक्ति है। यानी चेतना का निर्माण करने वालीं। कहते हैं कालिदास द्वारा रचित रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूत रचनाएं स्कंदमाता की कृपा से ही संभव हुईं।
स्कन्दमाता की पूजा करने से आत्मबल बढ़ता है। यह देवी ममता की मूरत है
और मन की कोमल भावों की शक्ति बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।
 भगवती देवी माँ स्कंदमाता के श्री चरणों में सत सत नमन!

HTML Embed Code
BB Code for forums
See More here: Nav Durga Shakti

Contributor:

More Pictures

  • Maa Durga Ka Panchva Swaroop Jai Skandmata
  • Maa Durga Ka Navava Swaroop Maa Siddhidatri
  • Maa Durga Ka Tisra Swaroop Maa Chandraghanta
  • Maa Durga Ka Tisra Swaroop Maa Kushmanda
  • Maa Durga Ka Dusra Swaroop Maa Brahmacharini

Leave a comment