Maa Siddhidatri Ji Ki Aarti


माँ दुर्गा की नवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है।
देवी पुराण के अनुसार भगवान शंकर ने इन्हीं
शक्तिस्वरूपा देवी की की उपासना करके सभी
सिद्धियाँ प्राप्त की थीं। जिसके प्रभाव से शंकरजी
का आधा शरीर स्त्री का हो गया था। 
माँ के दिव्य स्वरूप का ध्यान हमें अज्ञान, असंतोष
आदि के तमस से निकालकर उद्यम उत्साह व
संतुष्टि से ओत-प्रोत करता है। यह हमारी
महत्वाकांक्षाओं पर विजय भी प्रदान करके
हमें परम् सुख व शांति की अनुभूति कराता है।

यहां पढ़ें मां सिद्धिदात्री की आरती..
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तो की रक्षक तू दासो की माता

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि,
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि !!

कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम,
जभी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम!!

तेरी पूजा मैं तो न कोई विधि है,
तू जगदम्बें दाती तू सर्वसिद्धि है !!

रविवार को तेरा सुमरिन करे जो,
तेरी मूर्ति को ही मन मैं धरे जो!!

तू सब काज उसके कराती हो पूरे,
कभी काम उस के रहे न अधूरे !!

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया,
रखे जिसके सर पैर मैया अपनी छाया!!

सर्व सिद्धि दाती वो है भागयशाली,
जो है तेरे दर का ही अम्बें सवाली !!

हिमाचल है पर्वत जहाँ वास तेरा,
महा नंदा मंदिर मैं है वास तेरा !!

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता,
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता !!

माँ सिद्धिदात्री मंत्र
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। 
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

This picture was submitted by Smita Haldankar.

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